हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने प्रतिवादी निजी ठेकेदार सूर्या कंपनी की ओर से दायर उस आवेदन पर राहत देने से इन्कार कर दिया है, जिसमें उनके रोके गए भुगतान को जारी करने की मांग की गई थी। वेकेशन जज न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने स्पष्ट किया है कि मुख्य खंडपीठ की ओर से दिए गए आदेशों में वेकेशन बेंच तब तक हस्तक्षेप नहीं कर सकती, जब तक कि ठोस कारण न दिए जाए।
अदालत ने पाया कि आवेदन में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि नोटिस मिलने के बावजूद ठेकेदार पिछली सुनवाई पर कोर्ट में पेश क्यों नहीं हुआ।कोर्ट ने कहा कि भुगतान रोकने का निर्णय मुख्य खंडपीठ का है। वेकेशन बेंच इस आदेश में तब तक बदलाव नहीं कर सकती जब तक कि अनुपस्थिति का कोई ठोस और तर्कसंगत कारण न दिया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले के गुणों पर फैसला मुख्य खंडपीठ ही करेगी। कोर्ट ने इस आवेदन को अब मुख्य खंडपीठ के समक्ष उसी तिथि पर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है, जो पहले से तय की गई है। तब तक ठेकेदार के भुगतान पर लगी रोक बरकरार रहेगी।