कोर्ट ने परिवहन निदेशक को अगली सुनवाई के दौरान टैक्सियों में मीटर लगाए जाने से जुड़े तमाम रिकॉर्ड सहित उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने प्रेमराज व अन्यों की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के बाद जिलाधीश शिमला से पूछा था कि शिमला शहर में कितनी गाड़ियां पंजीकृत की गई हैं और क्या प्रत्येक गाड़ी मालिक ने अपनी पार्किंग के बाबत हाईकोर्ट के आदेशानुसार आरटीओ के समक्ष उल्लेख किया है या नहीं।
अगर नहीं किया है तो इन लोगों के खिलाफ इनके रजिस्ट्रेशन नंबर रद्द करने बाबत क्यों एक्शन नहीं लिया गया। कोर्ट ने इसके अलावा जिलाधीश और एसपी शिमला को शपथ पत्र के माध्यम से यह भी बताने को कहा था कि पंजीकृत की गई गाड़ियों में कितनी टैक्सियां हैं, जो शिमला शहर में चलाई जा रही हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा था कि क्या इन टैक्सी मालिकों ने अपनी टैक्सी पर उपभोक्ता से वसूले जाने वाले किराए बाबत मीटर लगा रखे हैं या नहीं।
उन्होंने टैक्सी में किराए बाबत साइन बोर्ड के साथ किराए की दरें दर्शा रखी है या नहीं। सरकार की ओर से बताया गया था कि मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने के बाद टैक्सियों में मीटर लगाने की प्रक्रिया को रोक दिया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी खारिज होने के बाद टैक्सियों में मीटर लगाने जरूरी होंगे। मामले पर सुनवाई 24 मई को होगी।