नौणी विवि के कुलपति के सेवा विस्तार की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि कुलाधिपति ने उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति देकर कोई अवैध कार्य नहीं किया है। राज्यपाल ने 6 मई को कुलपति राजेश्वर सिंह चंदेल के कार्यकाल विस्तार को मंजूरी दी थी। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने याचिकाकर्ता के तर्कों को खारिज करते हुए कुलपति के कार्यकाल विस्तार के आदेश को वैध माना। अदालत ने कहा कि कुलाधिपति के पास अधिकार है कि वह कुलपति को पद पर बने रहने की अनुमति दे सकते हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने कुलपति की नियुक्ति को रद्द करने की मांग नहीं की थी। संवाद
हाईकोर्ट ने एनएलयू के निलंबित सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति की बहाल
प्रदेश हाईकोर्ट ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू) घंडल के निलंबित अनुबंध कर्मचारियों की नियुक्तियों को बहाल करने के आदेश दिए हैं। इन कर्मचारियों को पहले अनुबंध के आधार पर विश्वविद्यालय नियुक्त किया था। बाद में इनकी सेवाओं को मौखिक तौर पर समाप्त कर दिया गया था। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत में इनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तिथि से नियमित करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही उनकी सेवा की अवधि को सभी परिणामी लाभों और वरिष्ठता के लिए गिनने को कहा है। न्यायालय ने पाया कि राष्ट्रीय विश्वविद्यालय ने जानबूझकर याचिकाकर्ताओं की अनुबंध सेवाओं में ब्रेक दी थी, जिससे कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में 240 दिन की सेवा पूरी न कर सकें, जो हिमाचल प्रदेश सरकार की नियमितीकरण नीति के तहत आवश्यक है। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं की सेवा समाप्ति के बाद भी विश्वविद्यालय में काम उपलब्ध था। उनकी ड्यूटी बाद में स्वीपर और चपरासी जैसे अन्य कर्मचारियों को सौंप दी गई थी। इसके अलावा विश्वविद्यालय ने सेवा समाप्ति के तुरंत बाद 8 जनवरी 2025 को सुरक्षा गार्ड्स की भर्ती के लिए एक नया विज्ञापन भी जारी किया था, जिसे बाद में इस मामले के कारण वापस ले लिया गया।