उच्च न्यायालय ने पुलिस उप निरीक्षक के खिलाफ ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप में विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं। आरोपी के खिलाफ मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम के तहत दर्ज आपराधिक मामले का चालान देरी से दायर करने का आरोप है। यह भी आरोप है कि उसने अपना स्थानांतरण ऊना से किन्नौर होने पर अभियोजन संबंधी फाइलें एसएचओ ऊना को समय पर नहीं सौंपीं।
फाइलें न सौंपने को लेकर अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था। आरोप है कि उप निरीक्षक खुद पुलिस विभाग से होने के कारण उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में कैंसेलेशन रिपोर्ट तैयार करवाने में कामयाब हो गया। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने पुलिस महानिदेशक को इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखने के निर्देश जारी किए हैं।
सब इंस्पेक्टर अंकुश डोगरा के खिलाफ गैरकानूनी ढंग से आपराधिक मामले की फाइल अपने पास रखने को कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने के आदेश जारी किए। पुलिस महानिदेशक को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे जांच अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करें। अभियोजन पक्ष के अनुसार मादक पदार्थ की तस्करी के आरोपी से 16 नवंबर 2016 को 4. 60 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी।
इस मामले को लेकर चालान 24 मई 2018 को कोर्ट के समक्ष दाखिल किया गया था। प्रार्थी ने हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल कर उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को इस कारण रद्द करने की गुहार लगाई थी कि उसके खिलाफ चालान देरी से दायर किया गया है। कोर्ट के आदेशों के अनुसार अनुपालना रिपोर्ट 5 जनवरी 2021 तक न्यायालय के समक्ष पेश करने के आदेश जारी किए हैं।