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डीसी, एसपी को हाईकोर्ट का नोटिस, दो सप्ताह के भीतर मांगा जवाब

Sat, 18 Nov 2017 04:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल हाईकोर्ट
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हत्या के मामले में दोबारा जांच करने के आग्रह को लेकर हाईकोर्ट के नाम लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन, जिलाधीश सिरमौर और पुलिस अधीक्षक सिरमौर को नोटिस जारी किया है।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने मामले में प्रतिवादियों से 2 सप्ताह के भीतर जवाबतलब किया है। मामले पर सुनवाई 12 दिसंबर को होगी।

प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि उसके पिता अमर सिंह बाबा चौक नाहन में रेडिमेड की दुकान चलाते थे। उनकी 5 जुलाई 2017 को रहरस्यमयी तरीके से हत्या कर दी गई थी। 9 जुलाई को उसने पुलिस के समक्ष एफआईआर दर्ज करवाई थी और चार आरोपियों के नाम भी पुलिस को बताए थे।
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एफआईआर दर्ज होने के बाद इन आरोपियों को जमानत मिल गई थी, क्योंकि जांच कार्य में पुलिस द्वारा ढील भर्ती गई थी। प्रार्थी ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस जानबूझ कर आरोपियों को बचाने में लगी है।

इस कारण से उन्होंने ठीक प्रकार से मामले की जांच पड़ताल नहीं की है। प्रार्थी ने न्यायालय से गुहार लगाई है कि पुलिस प्रशासन को आदेश दिए जाएं कि वह इस मामले की दोबारा से ठीक प्रकार से जांच पड़ताल करें।

रिटायर्ड अफसरों को पुनर्नियुक्ति देने पर सरकार को नोटिस

प्रदेश हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों को दोबारा रोजगार देने के खिलाफ  दर्ज जनहित याचिका के मामले में मुख्य सचिव व कार्मिक विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए कोर्ट ने तीन सप्ताह में जवाबतलब किया है। मामले पर सुनवाई 19 दिसंबर को होगी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने प्रार्थी चंदन ठाकुर द्वारा लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए ये आदेश पारित किए। प्रार्थी ने पत्र में लिखा है कि वह एक स्नातक बेरोजगार है, लेकिन सरकार अपने चहेतों को रिटायरमेंट के बाद दोबारा नियुक्ति देकर उस जैसे बेरोजगारों के साथ अन्याय कर रही है।

प्रार्थी का कहना है कि सरकार ने हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों को दोबारा नियुक्ति दी है। इनमें काफी लोग भ्रष्टाचार में भी लिप्त हैं। प्रार्थी का कहना है कि उसने इस बाबत राज्यपाल को भी पत्र लिखा था जिसे अतिरिक्त मुख्य सचिव के पास भेजा गया। वहां से उसके पत्र का उत्तर टालमटोल वाला ही रहा।

प्रार्थी का कहना है कि यह सारी प्रक्रिया केवल मंत्रियों या विशेष कार्यकर्ताओं के भ्रष्ट लोगों को इनाम प्रदान करना है। प्रार्थी ने कोर्ट से गुहार लगाई है की बेरोजगारों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा जारी पुनर्नियुक्ति प्रथा बंद करवाई जाए।

अवैध निर्माण पर राज्य सरकार से जवाबतलबी

उच्च न्यायालय ने सोलन नगर परिषद क्षेत्र के तहत पड़ने वाले 15 वार्डों में हो रहे अवैध निर्माण को लेकर सरकार से जवाबतलब किया है। एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने सोलन क्षेत्र के स्थानीय लोगों द्वारा मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए यह आदेश जारी किए। मामले की सुनवाई 19 दिसंबर को होगी।

प्रार्थियों के अनुसार 8 सितंबर 2017 को सोलन के स्थानीय लोगों द्वारा एक पत्र के माध्यम से हाईकोर्ट को अवगत करवाया गया था कि नगर परिषद सोलन क्षेत्र के तहत आने वाले 15 वार्डों में अत्यधिक अवैध निर्माण हो रहा है। नगर परिषद द्वारा दी गई स्वीकृति का भवन निर्माता खुलकर उल्लंघन कर रहे हैं।

प्रार्थियों का कहना है कि 10 अगस्त 2017 को समाचार पत्रों में छपी खबर के अनुसार उन्हें मालूम पड़ा कि प्रदेश हाईकोर्ट ने सोलन शहर में सेंट ल्यूक स्कूल से लेकर सपरून तक अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी किए हैं। प्रार्थियों के अनुसार प्रशासन हाईकोर्ट के आदेशानुसार अतिक्रमण हटाने में सफल रहा था।    लेकिन नगर परिषद सोलन अवैध निर्माणों को रोकने के मामलों में असमर्थ है। शिकायतकर्ता के अनुसार अवैध निर्माण के कारण नगर परिषद वार्डों में आम जनता को अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बहुत से विकास कार्य जैसे सीवरेज, ड्रेनेज व्यवस्था, एंबुलेंस रोड आदि बनने में मुश्किलें पैदा हो रही हैं।
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चिंतपूर्णी बस अड्डे की लीज पर जवाबतलबी

प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रधान सचिव परिवहन, महाप्रबंधक प्रदेश पथ परिवहन निगम और क्षेत्रीय प्रबंधक चिंतपूर्णी से जवाब तलब किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के नाम लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए ये आदेश पारित किए।

हाईकोर्ट के नाम लिखे पत्र में कहा गया है कि प्रार्थीगण जो मोहिनी गांव के निवासी हैं, अपनी-अपनी मलकीयत भूमि पर दुकानें और अन्य व्यवसाय कर 25 वर्षों से अपनी रोजी रोटी कमा रहे हैं। हाल ही में हिमाचल सरकार ने प्रदेश के बाहर के एक ठेकेदार को बस स्टैंड चिंतपूर्णी 33 वर्ष को लीज पर दे दिया है।

यह ठेकेदार निजी स्वार्थ के लिए गलत तरीके से कार्य कर रहा है। इससे इस गांव के लोग बेरोजगार हो रहे हैं। ठेकेदार इन दुकानदारों की दुकानों के आगे बड़ी दीवार का निर्माण कर रहा है।

वह प्रदेश पथ परिवहन निगम के लिए दुकानें और अन्य व्यवसाय कांपलेक्स का निर्माण कर रहा है, जिससे 25 वर्षों से अपना परिवार का पालन पोषण कर रहे दुकानदार और अन्य लोगों के व्यवसाय पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

लोगों ने न्यायालय से गुहार लगाई है कि उनकी समस्या और रोजगार को ध्यान में रखते हुए उचित आदेश पारित किए जाएं।
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