पति का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही पत्नी का व्यवहार बदल गया। वह बिना बताए मायके चली जाती थी और झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां देती। घर छोड़ने के बाद से पत्नी ने न तो अपने बच्चों से मिलने की कोशिश की और न ही फोन पर उनसे बात की। पत्नी ने कोर्ट में दलील दी कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और उसके साथ मारपीट की गई, जिसके कारण उसे घर छोड़ना पड़ा। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से यह साफ है कि दोनों पक्षकार सितंबर 2019 से अलग रह रहे हैं और उनके बीच वैवाहिक रिश्ते पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। पत्नी ने बिना किसी न्यायसंगत कारण के अपने वैवाहिक घर को छोड़ा। इसके साथ ही अपने खुद के मासूम बच्चों से दूरी बना लेना और उनसे बात तक न करना, पति और उसके परिवार के प्रति घोर मानसिक क्रूरता को दर्शाता है।