हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि भर्ती प्रक्रिया के दौरान किसी उम्मीदवार का अनुभव प्रमाणपत्र समय पर जमा करवा दिया गया है लेकिन उस पर अधिकारी के प्रति-हस्ताक्षर नहीं हैं, तो इसे केवल एक सुधार योग्य प्रक्रियात्मक त्रुटि माना जाएगा। कोर्ट ने माना कि ऐसी मामूली कमियों को सुधारने के लिए उम्मीदवारों को अतिरिक्त समय देना पूरी तरह से न्यायसंगत है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने विशाल कुमार की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला दिया। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग ने मार्च 2024 में ग्रुप इंस्ट्रक्टर के 12 पदों के लिए आवेदन मांगे थे। चेकलिस्ट कॉलम में उल्लेख था कि अनुभव प्रमाणपत्र संबंधित सरकारी अधिकारी या विभाग की ओर से सत्यापित या प्रति-हस्ताक्षरित होना चाहिए।