प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में ट्रॉमा सेंटर बनाने संबंधित मामले में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश व न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिए कि आईजीएमसी शिमला में जब तक ट्रॉमा सेंटर का निर्माण नहीं हो जाता तब तक नये ओपीडी ब्लॉक के धरातल व प्रथम मंजिल को ट्रॉमा सेंटर के तौर पर इस्तेमाल किया जाए। इसे सुचारु रूप से चलाने के लिए बचे हुए उपकरण इत्यादि जल्द से जल्द खरीद लिए जाएं।
कोर्ट ने आदेश दिए कि इंदिरा गांधी मेडिकल शिमला कॉलेज में 30 जून तक ट्रॉमा सेंटर को सभी उपकरणों व संसाधनों के साथ गतिशील कर दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि अगर कार्य को लेकर किसी भी तरह की अड़चन सामने आ रही है तो उस बाबत न्यायालय को सूचित किया जाए।
कोर्ट को बताया गया कि राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में ट्रॉमा सेंटर पहले ही अस्थाई तौर पर कैजुअल्टी ब्लॉक में स्थापित कर लिया गया है व ट्रॉमा सेंटर ने काम करना शुरू कर लिया है। न्यायालय ने केंद्र सरकार को आदेश जारी किए हैं कि राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज में ट्रॉमा सेंटर को लेवल 2 से लेवल 1 में तब्दील करने के लिए जल्द निर्णय लें।
वहीं मंडी के नेरचौक में ट्रॉमा सेंटर खोलने संबंधित मामले पर कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश जारी किए कि वह शपथ पत्र के माध्यम से कोर्ट को बताएं कि उनके द्वारा स्वीकृत 81 लाख की राशि का उपयोग किस तरीके से किया गया।
हमीरपुर में ट्रॉमा सेंटर खोलने को लेकर न्यायालय ने राज्य सरकार को आदेश जारी किए हैं कि जब तक ट्रॉमा सेंटर का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता है तब तक नए ब्लाक में ट्रॉमा सेंटर खोलने के लिए विचार करें। न्यायालय ने स्टेटस रिपोर्ट के माध्यम से न्यायालय को अवगत करवाने के आदेश जारी किए हैं लेवल 3 के ट्रॉमा सेंटर ऊना, रिकांगपिओ, कैलोग धर्मपुर, नूरपुर, नालागढ़, जोगिंदरनगर, पालमपुर व नाहन में स्थापित करने के लिए कदम उठाने के आदेश जारी किए हैं।
न्यायालय ने केंद्र सरकार को आदेश दिये हैं कि वह नेशनल हेल्थ मिशन के तहत स्वीकृत 8.29 करोड़ की राशि को 4 सप्ताह के भीतर जारी कर दे व केंद्र सरकार को इस बाबत शपथ पत्र दाखिल करने के आदेश जारी किए हैं। न्यायालय ने अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य को अपना शपथपत्र दाखिल करने के आदेश जारी किए। मामले पर सुनवाई 15 जुलाई को होगी।