हाईकोर्ट ने शिमला में वाहनों की अनाधिकृत पार्किंग और यातायात के कुप्रबंधन वाली याचिका का निपटारा करते हुए राज्य सरकार तथा नगर निगम शिमला को आदेश दिए हैं कि वे हर तीन महीने में कोर्ट के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करते रहे। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि समय-समय पर अदालत की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए कोर्ट में सरकार को आदेश दिए कि इस मामले में पारित आदेशों तथा कानून के नियमों के अनुसार शिमला शहर की सील्ड और रिस्ट्रिक्टेड सड़कों पर यातायात चलाया जाना सुनिश्चित करे। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश पंथाघाटी निवासी धर्मपाल ठाकुर की याचिका का निपटारा करते हुए आदेश पारित किए।
शिमला सड़क उपयोगकर्ताओं और पैदल चलने वालों (सार्वजनिक सुरक्षा और सुविधा) अधिनियम 2007 के कार्यान्वयन पर कोर्ट ने समय-समय पर सरकार से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए थे। सील्ड और प्रतिबंधित सड़कों पर वाहनों को चलाने के लिए अधिकारियों की ओर से दिए गए परमिटों की सूची पेश करने को कहा था।