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हिमाचल हाईकोर्ट: कुपवी कॉलेज में शिक्षकों की तैनाती का विवरण दे सरकार

Wed, 04 Oct 2023 08:05 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

अदालत ने सरकार को आदेश दिए कि इस कॉलेज में शिक्षकों और गैर शिक्षकों के खाली पदों को तय समय में भरा जाए।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने डिग्री कॉलेज कुपवी में शिक्षकों की तैनाती का विवरण मांगा है। अदालत ने सरकार को आदेश दिए कि इस कॉलेज में शिक्षकों और गैर शिक्षकों के खाली पदों को तय समय में भरा जाए। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने अनुपालना रिपोर्ट तलब की है। मामले की सुनवाई 28 नवंबर को होगी। मामले की पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने दूरदराज के स्कूलों के लिए शहर के भीड़भाड़ वाले स्कूलों से शिक्षकों की तैनाती करने के आदेश दिए थे। अदालत ने सरकार की ओर से दायर स्टेटस रिपोर्ट का अवलोकन कर पाया कि डिग्री कॉलेज कुपवी में शिक्षकों के आठ पद स्वीकृत हैं जोकि सभी खाली हैं।

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इसी तरह गैर शिक्षकों के दस पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल चपरासी के तीन और चौकीदार के दो पद भरे गए हैंं। दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर पर अदालत ने संज्ञान लिया है। खबर में प्रकाशित किया था कि पूर्व सीएम जय राम ठाकुर ने नवंबर 2021 में घोषणा की थी कि इस दूरदराज क्षेम में कॉलेज खोला जाएगा। पहले बैच को जुलाई 2022 में भर्ती कराया था। हालांकि कॉलेज में पांच चापरासी और एक क्लर्क है, लेकिन कोई भी शिक्षक नहीं है। कॉलेज के पीटीए संघ ने दो निजी शिक्षकों को काम पर रखा है। कुपवी कॉलेज के पास अपनी खुद की इमारत भी नहीं है। कक्षाओं को पास के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के एक स्टोररूम में शुरू किया था, जो अब इसे खाली करना चाहता है।

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अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए क्रेडिट सोसायटी पर 30 हजार की लगाई कॉस्ट

 यूपी की क्रेडिट सोसायटी के अनुचित व्यापार व्यवहार पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने 30 हजार की कॉस्ट लगाई है। साथ ही शिकायतकर्ता लोप चंद के एफडी में निवेश किए गए पैसे वापस करने के दिए आदेश दिए हैं। 13 अलग-अलग शिकायतों का निपटारा करते हुए आयोग ने हरेक शिकायत के लिए कॉस्ट लगाई है। आयोग ने यूपी की क्रेडिट सोसायटी की कार्यशैली को अनुचित व्यापार व्यवहार बताया है। आयाेग को बताया कि यूपी की कामुना सहकारी सभा बहु राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम 2002 के तहत पंजीकृत है। पहले इसका कार्य क्षेत्र उत्तर प्रदेश तक ही सीमित था। बाद में इसका कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और गुजरात तक विस्तारित किया गया।

शिमला के ढली में भी सोसायटी ने कार्यालय खोला और विकास अधिकारी नियुक्त किए। इन अधिकारियों ने शिकायतकर्ता को सोसायटी के पास बचत खाते खोलने का प्रलोभन दिया। शिकायतकर्ता ने 75 महीने की अवधि के लिए 50,000 रुपये की राशि और एफडी खाते में एक लाख रुपये की राशि जमा करवाई। बाद में शिकायतकर्ता ने पाया कि सोसायटी उसके पैसे वापस नहीं करना चाहती है। उसने सोसायटी के कार्यालय में अपने पैसे वापस करने का आग्रह किया लेकिन सोसायटी ने उसके पैसे वापस नहीं किए। आयोग ने शिकायत दर्ज होने के बाद सोसायटी को नोटिस जारी किया, लेकिन सोसायटी ने आयोग के समक्ष अपना पक्ष नहीं रखा। आयोग ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद यह निर्णय सुनाया।
 
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