हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वर्ष 2025 में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कुल स्वीकृत पदों में से 5 जज कम होने के बावजूद हाईकोर्ट ने सालभर में दायर हुए मामलों में से लगभग 90 प्रतिशत का निपटारा कर दिया। त्वरित न्याय, संवेदनशील समूहों को प्राथमिकता और पुराने मामलों को सुलझाने के लिए किए गए सुधारों से यह संभव हो पाया है।
आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2025 को कोर्ट में 93,942 मामले लंबित थे। पूरे वर्ष के दौरान 81,092 नए मामले दर्ज किए गए, जिनमें से कोर्ट ने 72,981 मामलों का निपटारा किया। साल के अंत तक कुल लंबित मामले 102,053 रहे। यह सफलता मुख्य न्यायाधीश सहित मात्र 12 न्यायाधीशों की मेहनत से मिली। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया के नेतृत्व में कोर्ट ने जेल में बंद दोषियों, यौन उत्पीड़न, महिलाओं के विरुद्ध अपराध, किशोरों और वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी। वर्षों से लंबित पड़े मामलों को खत्म करने के लिए हाईकोर्ट ने एक ठोस योजना ‘स्पेशल सैटरडे’ बनाई है। इसके तहत वर्ष 2026 में 12 शनिवारों को कार्य दिवस घोषित किया गया है, जिसमें केवल सबसे पुराने मामलों की सुनवाई की जाएगी। हिमाचल की जिला अदालतों ने हाईकोर्ट से भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए 106.23 फीसदी की निकासी दर हासिल की।
न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक जिला और सिविल जज के कई रिक्त पदों को भरा गया। इसके अलावा 4 अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश और 5 सिविल जज के पद सृजित किए गए। नूरपुर, अंब और बिलासपुर में तीन नई अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालतें शुरू की गईं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से 3 और अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालतें और 34 सिविल जज अदालतों को जल्द खोलने का आग्रह किया गया है।