कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के आईटीआई संस्थाओं के प्रशिक्षक चंबा जिले के जनजातीय क्षेत्र किलाड़ में स्थित आईटीआई के प्रशिक्षुओं को छोटे भगवान द्वारा बनाये गए बच्चे समझते हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने ऐसी टिप्पणी करने की वजह बताते हुए कहा कि यह तीसरा मामला है जिसमें आईटीआई प्रशिक्षक ने किलाड़ जाने में असमर्थता जताई है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जनजातीय इलाकों में सेवाएं देने से बचने वाले शिक्षा से जुड़े कर्मचारियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे इन इलाकों में पढ़ने वाले बच्चों को छोटे भगवान के बनाये बच्चे समझते हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के आईटीआई संस्थाओं के प्रशिक्षक चंबा जिले के जनजातीय क्षेत्र किलाड़ में स्थित आईटीआई के प्रशिक्षुओं को छोटे भगवान द्वारा बनाये गए बच्चे समझते हैं।
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न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने ऐसी टिप्पणी करने की वजह बताते हुए कहा कि यह तीसरा मामला है जिसमें आईटीआई प्रशिक्षक ने किलाड़ जाने में असमर्थता जताई है। कोर्ट ने प्रार्थी द्वारा किलाड़ न जा पाने के लिए बताई कठिनाइयों को पर्याप्त न पाते हुए उसकी याचिका को खारिज कर दिया।