कर्मचारी को वर्कचार्ज दर्जा देने का आदेश
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रतिवादी सरकार सहित कृषि विवि पालमपुर को निर्देश दिए हैं कि 6 सप्ताह के भीतर दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी को उनके 8 साल की सेवा पूरी होने पर 1 जनवरी 2002 से वर्कचार्ज का दर्जा प्रदान करें, लेकिन यह लाभ केवल काल्पनिक (नोशनल) आधार पर होगा। यानी पिछली अवधि का वित्तीय बकाया नहीं मिलेगा। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि एक बार जब भी कोई कर्मचारी 8 साल की निरंतर सेवा पूरी कर लेता है तो उसे वर्कचार्ज का दर्जा देना उसका अधिकार है।
यह लाभ उसे नियमित होने से पहले मिलना चाहिए। अदालत ने माना कि देरी के आधार पर याचिका को खारिज करना सही नहीं था, क्योंकि वर्कचार्ज का दर्जा और उससे मिलने वाले लाभ एक निरंतर कारण है। खंडपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के सूरजमणि और अश्वनी कुमार मामलों का हवाला देते हुए कहा कि वर्कचार्ज का दर्जा देना अनिवार्य है। यह जजमेंट इन रिम है यानी सभी सामान मामलों पर लागू होता है। खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के फैसले को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को यह लाभ देने के आदेश दिए। एकल न्यायाधीश ने याचिका को दायर करने में देरी के चलते खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता नरेश कुमार 1993 में दैनिक वेतनभोगी मजदूर के रूप में नियुक्त किया गया था।