प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कार्यालयों से विभिन्न श्रेणियों के लिए जारी किए जाने वाले प्रमाण पत्रों को प्राप्त करने के लिए बने नियमों में कमी और इन्हें जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए व्यापक दिशा निर्देश तय किए हैं। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा प्रावधानों की गलत व्याख्या के कारण लोग कई बार अनावश्यक रूप से परेशान होते हैं।
कुछ लोग प्रमाण पत्र पाने के लिए न्यायालयों के दरवाजे खटखटाते हैं जबकि पीड़ित लोग गरीबी, बीमारी, कानून की अज्ञानता, अशिक्षा या अन्य कारणों से अदालत में आने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं। न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर और न्यायाधीश चंद्र भूषण बारोवालिया की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सभी संबंधित प्राधिकरणों को बोनाफाइड हिमाचली, एससी एसटी, ओबीसी श्रेणी, बीपीएल, एपीएल आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए हाईकोर्ट के आदेशानुसार उचित निर्देश जारी करे।
न्यायालय ने यह आदेश अश्विनी कुमार की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए दिए। न्यायालय ने कहा कि बोनाफाइड प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए पिछले 20 वर्षों या उससे अधिक समय से हिमाचल प्रदेश में रहने वाले एक व्यक्ति की स्थिति पहले से मौजूद है लेकिन अधिकारियों की ओर से कठोरता से इसकी व्याख्या की जा रही है। इससे लोगों को विविध उपयोग के लिए आवश्यक बोनाफाइड प्रमाणपत्र पाने में कठिनाई हो रही है।
विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए न्यायालय ने कहा है कि एक डिस्पेंसरी, मेडिकल बोर्ड के चिकित्सा अधिकारी की ओर से जारी प्रमाण पत्र, जो प्रचलन में दिशा निर्देशों के अनुसार है इस तथ्य का प्रमाण होगा कि आवेदक शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विभिन्न प्रमाण पत्र हासिल करने के लिये उपरोक्त शर्तें मौजूदा शर्तों के अतिरिक्त है।