न का मतलब नहीं ही होता है मगर सबसे सरल वाक्य कुछ पुरुषों को समझना मुश्किल है। न का मतलब हां नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि लड़की शर्मीली है, न ही यह मतलब है कि लड़की एक आदमी को कह रही है कि वह उसे राजी करें। यह भी मतलब नहीं है कि वह उसका पीछा करना जारी रखे। कोर्ट ने यह टिप्पणी 17 साल की युवती के साथ बदसलूकी करने के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
आरोपी की याचिका को खारिज करते हुए हिमाचल हाईकोर्ट के न्यायाधीश अनूप चिटकारा ने कहा कि न शब्द को किसी और स्पष्टीकरण या औचित्य की आवश्यकता नहीं है। यह वहां समाप्त होता है जहां आदमी को रोकना होता है। अदालत ने आगे कहा कि पीडि़ता के अनुसार न कहने के बावजूद आरोपी ने पीडि़ता को छूना जारी रखा। अभियोजन पक्ष के अनुसार 17 दिसंबर 2020 को पीडि़ता सिरमौर जिले के राजगढ़ बस स्टैंड पर बस का इंतजार कर रही थी। आरोपी जो पीडि़ता का दोस्त था, अपनी पिकअप जीप में पहुंचा और पेशकश की कि वह उसे उसके घर पर छोड़ देगा।
पीडि़ता वाहन में बैठ गई लेकिन आरोपी सही रास्ते के बजाय किसी अन्य रास्ते में चक्कर लगाने लगा। पीडि़ता के पूछने पर उसने कहा कि वह आगे यूटर्न ले लेगा और उसे उसके घर छोड़ देगा। हालांकि उसने ऐसा नहीं किया और जीप को एकांत जगह पर ले गया। फिर अनुचित रूप से पीड़िता को छूना शुरू कर दिया। लड़की ने छूने से न कहा, मगर उस पर इसका असर नहीं हुआ। फिर उसने उससे पूछा कि क्या वह उससे शादी करेगी। लड़की ने उसे शादी के लिए न कहा। उसके बाद आरोपी ने पीड़िता से बदसलूकी की। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 व पोक्सो एक्ट के प्रावधानों के तहत राजगढ़ पुलिस स्टेशन में 17 दिसंबर 2020 को मामला दर्ज किया था।