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हिमाचल हाईकोर्ट: सरकारी सुस्ती की वजह से आयु सीमा पार करने वाले को अनुकंपा नियुक्ति से नहीं कर सकते इन्कार

Fri, 09 Jan 2026 06:00 AM IST
अंकेश डोगरा भारती मेहता, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर विभाग की सुस्ती के कारण कोई अभ्यर्थी नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान अधिकतम आयु सीमा पार कर जाता है, तो उसे नौकरी देने से इन्कार नहीं कर सकते। जानें पूरा मामला...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी के एक मामले में मानवीय और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर विभाग की सुस्ती के कारण कोई अभ्यर्थी नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान अधिकतम आयु सीमा पार कर जाता है, तो उसे नौकरी देने से इन्कार नहीं कर सकते। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने विभाग की ओर से 28 जनवरी 2025 को जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत याचिकाकर्ता की नियुक्ति रोकी गई थी।

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हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता को 5 मई 2021 की स्वीकृत सिफारिशों के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाए और यह प्रक्रिया चार हफ्ते में पूरी की जाए। याचिकाकर्ता अरुण शर्मा के पिता शिक्षा विभाग में ड्राइवर थे। उनका निधन साल 2009 में सेवा के दौरान हुआ था। याची ने उसी वर्ष क्लर्क पद के लिए आवेदन किया। उस समय उनकी आयु मात्र 33 वर्ष थी। हैरानी की बात यह है कि विभाग ने इस आवेदन पर निर्णय लेने में 10 साल लगा दिए।

साल 2019 में उनका नाम चयनित सूची में शामिल किया और 2021 में सरकार ने 104 अभ्यर्थियों की सूची को मंजूरी दी, जिसमें याचिकाकर्ता का नाम 27वें स्थान पर था। विवाद तब शुरू हुआ जब याचिकाकर्ता से नीचे वाले रैंक (28वें स्थान) के अभ्यर्थी को नियुक्ति दे दी, लेकिन याचिकाकर्ता का आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया कि नियुक्ति आदेश जारी होने तक वह 46 वर्ष के हो चुके थे, जबकि सरकारी सेवा के लिए आयु सीमा अधिकतम 45 वर्ष होनी चाहिए। 

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दो साल नियमित सेवा पर सभी शिक्षकों को मिलेगा संशोधित वेतनमान : हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पुराने नियमित शिक्षकों को संशोधित वेतनमान के लाभ से वंचित रखा जा रहा था। अदालत ने सरकार के उस तर्क को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ताओं को 2012 के नियमों के तहत लाभ मिल चुका है, इसलिए वे 2022 के संशोधित वेतनमान के हकदार नहीं हैं। अदालत ने इसे आधारहीन करार दिया।

न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने स्पष्ट किया कि 2022 के वेतन नियमों का लाभ उन सभी कर्मचारियों को मिलेगा, जिन्होंने निर्धारित शर्तें पूरी की हैं। अदालत ने नाराजगी जताई कि स्पष्ट कानूनी मिसाल (इंद्र सिंह ठाकुर मामला) होने के बावजूद अधिकारियों ने याचिकाकर्ताओं के दावों को खारिज किया। इसके चलते अदालत ने विभाग पर 10 हजार का जुर्माना लगाया गया है। कोर्ट ने यह राशि आईजीएमसी शिमला के गरीब मरीज उपचार कोष में जमा करने का आदेश दिया है।

उच्च न्यायालय ने सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं के मामले पर इंद्र सिंह ठाकुर फैसले को लेकर पुनर्विचार करें। संशोधित वेतनमान के अनुसार उनके वेतन का नए सिरे से निर्धारण करें। यह पूरी प्रक्रिया चार सप्ताह के भीतर पूरी की जाए और बकाया राशि का भुगतान किया जाए। अदालत ने फैसले में स्पष्ट किया है कि संशोधित वेतन नियम 2022 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो 3 जनवरी 2022 से पहले नियमित हुए कर्मचारियों को इसके दायरे से बाहर रखता हो।
 
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