प्रदेश हाईकोर्ट ने मौजूदा भाजपा सरकार के राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष अमित नंदा और अन्य सदस्यों के नॉमिनेशन वापस लेने वाली अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने अमित नंदा की दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया।
याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार 20 अप्रैल 2016 को हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग का गठन किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जातियों के लोगों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई नीतियों, कार्यक्रमों व प्रावधानों की अनुपालना सुनिश्चित करवाना था।
25 सितंबर 2017 को अमित नंदा को आयोग का अध्यक्ष, राजेंद्र मोहन, संजीव खटोला व रंजना देवी को सदस्य बनाया गया था। उधर, सरकार ने 10 मई 2018 को 25 सितंबर 2017 को जारी अधिसूचना को वापस ले लिया था। इसे हाईकोर्ट के समक्ष याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई। प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस तरह की अधिसूचना जारी करने के लिए सक्षम है।