मामले की जांच उप पुलिस अधीक्षक के ओहदे वाले अधिकारी करें। अगर प्रथम दृष्टया यह साबित हो जाता है कि इन लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला बनता है तो इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद उसे अंतिम रूप तक ले जाया जाए।
हालांकि, सुनवाई के दौरान प्रार्थी कौशल्या देवी ने याचिका को वापस लेने की गुहार लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि मात्र जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जांच के दौरान सामने आई सच्चाई को नजरअंदाज करने के उद्देश्य से प्रार्थी की याचिका को वापस लेने वाली मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उधर, जिलाधीश सिरमौर ने न्यायालय में दायर शपथ पत्र में बताया कि उन्होंने जांच में पाया कि नायब तहसीलदार हरिपुरधार ने जो आय प्रमाण पत्र जारी किया था, वह कृषि भूमि से जुड़ी आय पर आधारित था। पटवारियों की रिपोर्ट पर तैयार किया गया यह प्रमाण पत्र वास्तविक तौर पर गलत पाया गया।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ अधिकारी व कर्मचारी शायद भूल गए हैं कि सरकारी कार्यालय जिन्हें वे चलाते हैं, उनका सदुपयोग किया जाए न कि दुरुपयोग। अगर इन्हें चलाने वाले इस नियम को भंग करते है तो देश का कानून शक्तिहीन नहीं है।