हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम अनिवार्य योग्यता न रखने वाले किसी भी अयोग्य उम्मीदवार को सेवा में बने रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि अयोग्य व्यक्ति को नौकरी पर रखना सार्वजनिक रोजगार में धोखाधड़ी और अवैधता को बढ़ावा देने जैसा है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश रंजन शर्मा की अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर कि उम्मीदवार गलती से चयन प्रक्रिया में शामिल हो गया और उसने जॉइन कर लिया, उसे अयोग्य होने के बावजूद पद पर बने रहने का अधिकार नहीं मिल जाता।
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विभाग ने उम्मीदवार को अपनी योग्यता साबित करने का पूरा मौका दिया था, लेकिन वह प्रमाणपत्र पेश करने में विफल रहा, इसलिए उसकी बर्खास्तगी पूरी तरह कानूनी और वैध है। याचिकाकर्ता बलदेव को 2014 में स्कूल प्रबंधन समिति के तहत राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल सरनी (मंडी) में अंग्रेजी विषय के पोस्ट-ग्रेजुएट टीचर के रूप में नियुक्त किया गया था। लेकिन भर्ती नियमों के तहत अनिवार्य योग्यता ( एमए इंग्लिश) का डिग्री सर्टिफिकेट न होने के कारण नियुक्ति के महज 10 दिन बाद ही उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थी। याचिकाकर्ता ने इस बर्खास्तगी को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।