हाईकोर्ट ने एसआईटी की ओर से आदेशों की अनुपालना न करने पर भी खेद जताया। कोर्ट ने सरकार से अन्य जिलों की अतिक्रमण की स्थिति के बारे में अवगत करवाने को कहा है। इस बाबत सचिव वन को हलफनामा दायर करने की भी आदेश दिए हैं।
वन भूमि पर अतिक्रमणकारियों के चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिनमें तहसील जुब्बल के एक ही परिवार के 13 सदस्यों ने 2700 बीघा जमीन पर कब्जा किया था। कोटखाई तहसील में भी एक ही गांव के लोगों ने 1500 बीघा से ज्यादा वन भूमि पर कब्जा किया था।
छह अप्रैल 2015 को न्यायाधीश राजीव शर्मा की खंडपीठ ने सरकार को वन भूमि से अतिक्रमण तुरंत हटाने के आदेश दिए थे और अतिक्रमणकारियों के बिजली-पानी कनेक्शन काटने को भी कहा था। इन आदेशों के बाद राज्य सरकार हरकत मेें आई और शिमला जिला के ऊपरी क्षेत्रों में लगभग सैकड़ों बीघा से
अतिक्रमण हटाया गया। पांच हजार से अधिक सेब के पेड़ोें को काट गिराया गया। जुलाई 2018 में हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने को एसआईटी गठित की थी। इसके लिए सेना की ईको टास्क फोर्स को भी मदद के लिए तैनात किया था।