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शपथपत्र देकर बताएं अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की: हाईकोर्ट

Thu, 03 May 2018 10:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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हाईकोर्ट में बद्दी में स्थापित उद्योगों की ओर से प्रदूषण फैलाने की शिकायत को लेकर चल रहे मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चेयरपर्सन और अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा को निजी शपथपत्र दायर कर बताने को कहा है कि दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।

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 कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव की ओर से दायर शपथपत्र को रिकार्ड पर लेते हुए मामले पर सुनवाई 7 मई को निर्धारित करने के आदेश दिए।

बीते दिनों हाईकोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव के शपथपत्र को गुमराह करने वाला बताते हुए कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने शपथपत्र का अवलोकन करने पर पाया था कि इसे हाईकोर्ट के निर्देशानुसार दायर नहीं किया गया।

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कोर्ट ने आदेशों में ये कहा था

कोर्ट ने आदेशों में कहा था कि जब तक यह शपथपत्र दायर नहीं किया गया था, तब तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कोर्ट को गुमराह करने में लगा रहा। यह दर्शाने का प्रयत्न करता रहा कि जमीनी स्तर पर सब कुछ बहुत बढ़िया चल रहा है।

कागजों में बताया जाता रहा कि बोर्ड के कर्मी ईमानदारी से पर्यावरण कानूनों की अनुपालना करवा रहे हैं। कोर्ट ने झूठे शपथपत्र दायर करने वालों से उचित समय पर निपटने के आदेश भी पारित किए हैं। कोर्ट ने खेद जताया था कि अतिरिक्त मुख्य सचिव के शपथपत्र में यह कहीं नहीं बताया गया कि बोर्ड के दोषी कर्मियों के खिलाफ  क्या कार्रवाई की गई।

शपथपत्र में यह भी नहीं बताया गया था कि बद्दी तहसील के तहत गांव बटेड़ में मैसर्ज हरिपुर क्राफ्ट कंपनी गांव गुरुमाजरा में मैसर्ज नॉक्सपर फार्मा प्राइवेट लिमिटेड व बद्दी में मैसर्ज सिलान ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के पास पर्यावरणीय मंजूरी न होने के बावजूद किसने इन उद्योगों को काम करने की इजाजत दी।
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