कोर्ट ने आदेशों में कहा था कि जब तक यह शपथपत्र दायर नहीं किया गया था, तब तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कोर्ट को गुमराह करने में लगा रहा। यह दर्शाने का प्रयत्न करता रहा कि जमीनी स्तर पर सब कुछ बहुत बढ़िया चल रहा है।
कागजों में बताया जाता रहा कि बोर्ड के कर्मी ईमानदारी से पर्यावरण कानूनों की अनुपालना करवा रहे हैं। कोर्ट ने झूठे शपथपत्र दायर करने वालों से उचित समय पर निपटने के आदेश भी पारित किए हैं। कोर्ट ने खेद जताया था कि अतिरिक्त मुख्य सचिव के शपथपत्र में यह कहीं नहीं बताया गया कि बोर्ड के दोषी कर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
शपथपत्र में यह भी नहीं बताया गया था कि बद्दी तहसील के तहत गांव बटेड़ में मैसर्ज हरिपुर क्राफ्ट कंपनी गांव गुरुमाजरा में मैसर्ज नॉक्सपर फार्मा प्राइवेट लिमिटेड व बद्दी में मैसर्ज सिलान ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के पास पर्यावरणीय मंजूरी न होने के बावजूद किसने इन उद्योगों को काम करने की इजाजत दी।