अदालत ने याचिकाकर्ता पति की इस दलील को खारिज कर दिया कि वह 78 वर्ष के वृद्ध हैं और केवल सामाजिक/वृद्धावस्था पेंशन पर निर्भर हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल बुजुर्ग होना किसी व्यक्ति को अपनी पत्नी के भरण-पोषण के दायित्व से मुक्त नहीं करता। सुनवाई के दौरान सामने आया कि याचिकाकर्ता ने पहली पत्नी के होते हुए दूसरा विवाह किया था और उसकी दूसरी पत्नी के बेटों के नाम पर संपत्ति/भूमि दर्ज है। इसके अलावा पत्नी की जिरह के दौरान पति के पास गाड़ियां/ट्रक होने के दिए गए बयान को भी पति पक्ष की ओर से चुनौती नहीं दी गई थी। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के समय में एक वृद्ध महिला 3,500 के गुजारा भत्ते और 1,500 की सामाजिक पेंशन से कैसे अपना गुजारा करेगी, यह सोचनीय है।