मोदी सरकार से हिमाचल को काफी उम्मीदें हैं। भाजपा के प्रभारी के तौर पर कई साल हिमाचल में बिता चुके नरेंद्र मोदी यदि चुनावी रैलियों में दिखाए सपनों को ही पूरा कर दें, तो हिमाचल विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।
सेब को सुरक्षा मिलेगी और पहाड़ों पर रेल दौड़ेगी। हिमाचल के लिए सच में अच्छे दिन आ जाएंगे। बशर्ते मोदी को अपने वादें याद रहें। मोदी ने 16 फरवरी को सुजानपुर रैली में कहा था कि पर्वतीय राज्यों के लिए अलग विकास माडल की जरूरत है, क्योंकि पहाड़ों की जरूरतें और दिक्कतें अलग हैं।
वह 29 अप्रैल को फिर हिमाचल आए और पालमपुर, मंडी और सोलन में तीन रैलियां कीं। बोले- सेब को सहारा चाहिए। बाहरी देशों से हो रहा आयात कम करना होगा ताकि हिमाचल के सेब को सही कीमत मिले। सोलन के मशरूम को मार्केटिंग चाहिए। यहां पर्यटन को रोजगार और विकास से जोड़ना होगा। इसके लिए रेल विस्तार जरूरी है।
आसान नहीं है डगर
दूसरा पहलू यह है कि मोदी की सरकार ऐसे वक्त में आ रही है, जब देश में 14वें वित्तायोग की सिफारिशें लागू होने वाली हैं। 13वें वित्तायोग से हिमाचल को 10 हजार करोड़ का नुकसान हो गया था। जुलाई में मोदी सरकार अपना पहला बजट पेश करेगी। हिमाचल सरकार ने इस साल 23 हजार करोड़ का बजट पेश किया था, लेकिन वह बजट 5354 करोड़ वित्तीय घाटे वाला था।
4400 करोड़ का एनुअल प्लान भी अभी फाइनल नहीं है। योजना आयोग इस्तीफा दे चुका है। नए का अभी गठन होना है। ऐसे में क्या मोदी बजट में हिमाचल को कोई राहत देंगे? खासकर तब, जबकि राज्य में कांग्रेस की सरकार है। प्रधान सचिव (वित्त) डा. श्रीकांत बाल्दी कहते हैं कि 13वें वित्तायोग की क्षतिपूर्ति का वक्त अब निकल गया, लेकिन हमें आने वाले बजट और रेल विस्तार के क्षेत्र में जरूर उम्मीद है।
मिलकर काम करना चाहते हैं
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि हम नई सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने थे, तो हिमाचल के प्रति उनका रुख सकारात्मक होता था। उम्मीद है नरेंद्र मोदी भी राज्य के विकास में मददगार साबित होंगे।
वीरभद्र का कितना साथ देंगे मोदी?
हिमाचल की वीरभद्र सरकार का कितना साथ नरेंद्र मोदी देंगे, यह बड़ा सवाल है। चुनाव प्रचार में मोदी के निशाने पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह रहे हैं। सुजानपुर में बोले थे- डा. मनमोहन सिंह कहते हैं कि पैसे पेड़ों पर नहीं उगते, लेकिन उनके मुख्यमंत्री ने तो यह कर दिखाया।
इस आशंका के कुछ और कारण भी हैं। वीरभद्र सिंह ने अरुण जेटली, धूमल और अनुराग के खिलाफ मानहानि केस कर रखा है। बाबा रामदेव के साधुपुल योगपीठ की जमीन वापस ले ली है।
नई सरकार में ये सभी चेहरे अब ताकतवर हैं। प्रशांत भूषण से लड़ाई मोल लेकर वीरभद्र सीबीआई केस झेल रहे हैं। अंदेशा है कि सरकार बदलने के बाद सीबीआई भी अप्रोच बदलेगी।