उपमंडल भोरंज के तहत पपलाह जंगल में चावल से भरी 24 बोरियां बरामद हुई हैं। चावल की बोरियों के साथ यहां पर सस्ते राशन के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के फोटो युक्त थैले भी पड़े हुए हैं। इस तरह जंगल में सरकारी राशन को खुले में फेंकने से खाद्य आपूर्ति विभाग और राज्य नागरिक आपूर्ति निगम की कार्यप्रणाली कटघरे में है।
क्योंकि किस राशन डिपो में कितना स्टॉक जारी हुआ और कितनी खपत हुई, इसकी हर माह जांच का जिम्मा निगम और विभाग दोनों पर है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर भोरंज के पपलाह के जंगल में यह राशन कौन फेंककर चला गया। शनिवार को जब ग्रामीणों ने चावलों की बोरियों को देखा तो इसकी सूचना पंचायत प्रधान को दी।
स्थानीय निवासी देवेंद्र कुमार, शशि पाल, रोशन लाल, वीना देवी आदि ने कहा कि बोरियों के ढेर को देखकर लग रहा है कि यह चावल सस्ते राशन की दुकान का है। इसमें दाल और गेहूं भी शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार गरीबों को सस्ते अनाज देने की बड़ी-बड़ी बातें कर रही है।
लेकिन जिस प्रकार यहां जंगल में अनाज फेंका हुआ है। उससे स्पष्ट हो रहा है कि प्रदेश में प्रत्येक गरीब को राशन नहीं मिल पा रहा है। इससे डिपो होल्डर की की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहा है। चावल की बोरियां कैसे खराब हुईं और समय रहते इनका आवंटन क्यों नहीं हुआ, इस पर कई तरह के प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
पंचायत पपलाह के पूर्व उपप्रधान सुरेंद्र कुमार ने कहा कि जब पंचायत प्रतिनिधियों के साथ जांच की तो चावल की बोरियों में दाल, गेहूं के दाने भी मिश्रित पाए गए। उन्होंने खाद्य आपूर्ति विभाग से इस मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि भोरंज के विधायक सुरेश कुमार से मामले को लेकर शिकायत की जाएगी। उन्होंने आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इस मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही पता चल जाएगा कि यह चावल किसने और क्यों फेंके हैं।
- संजीव वर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक, हिप्र राज्य नागरिक आपूर्ति निगम हमीरपुर।