हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को स्मार्ट और कलरफुल वर्दी नहीं मिली है। प्रदेश सरकार हर साल पहली से लेकर 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को हर साल दो वर्दियां देती है।
सूबे में साढ़े पंद्रह हजार से अधिक प्राइमरी, मिडल, हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। सरकार पहली से दसवीं कक्षा तक महात्मा गांधी वर्दी योजना के तहत बच्चों को वर्दी देती है, जबकि 11वीं और 12वीं के छात्रों को यह वर्दी मुख्यमंत्री वर्दी योजना के तहत दी जाती है।
हैरानी इस बात की है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को आज तक कभी भी समय पर वर्दी नहीं मिली है। सरकार हर साल बच्चों को वर्दी साल के अंत में देती रही है। साल भर बच्चों को या तो पुरानी या फटी हुई स्कूल यूनिफार्म में आना पड़ता है या अभिभावकों को पैसे खर्च कर नई वर्दी खरीदनी पड़ती है। प्रदेश सरकार ने इस साल पहली से जमा दो कक्षाओं तक के आठ लाख से अधिक विद्यार्थियों को कलरफुल स्मार्ट वर्दी देने की योजना थी।
इसके अंतर्गत छात्रों को ग्रे रंग की पेंट और हरे रंग की कमीज तथा छात्राओं को पीले रंग का कुर्ता और भूरे रंग की सलवार और दुपट्टा देने की योजना है, लेकिन यह योजना सिरे चढ़ती नजर नहीं आ रही है।
उधर, प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय शिमला के निदेशक रोहित जम्वाल का कहना है कि इस बार स्कूलों में बच्चों को स्मार्ट वर्दी दी जाएगी। इस कारण देरी हुई है। बच्चों को जल्द वर्दी देने की व्यवस्था के लिए राज्य आपूर्ति निगम को कहा गया है।