सूबे में सैकड़ों शिक्षकों को डिमोट किया जाएगा। पूर्व सैनिकों को वरिष्ठता न देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रदेश सरकार ने यहब फैसला लिया है। शिक्षा उपनिदेशकों, प्रिंसिपलों सहित कई श्रेणी के सैकड़ों शिक्षकों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की गाज गिरना तय है। 22 शिक्षकों को डिमोट करने के आदेश भी जारी हो गए हैं।
इनमें से प्रिंसिपल को लेक्चरर और हेडमास्टर से पीजीटी डिमोट किए गए हैं। यह भी बताया जा रहा है कि कुछ उपनिदेशकों को भी डिमोट कर दिया गया है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों और शिक्षा निदेशालय में नियुक्त करीब 200 पूर्व सैनिक शिक्षकों से वरिष्ठता लाभ वापस लिए जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैनिक कोटे से भर्ती हुए शिक्षकों को सेना के सेवाकाल की वरिष्ठता देने से इंकार किया है। इस फैसले पर अमल करते हुए शिक्षा विभाग नए सिरे से वरिष्ठता सूची बनाने में जुट गया है। सभी जिला उपनिदेशकों से इस बाबत रिकॉर्ड मांगा गया है।
कुछ शिक्षा उपनिदेशकों को डिमोट कर प्रिंसिपल और प्रिंसिपलों को डिमोट कर प्रवक्ता बनाने की सूची जिलों को भेज भी दी है। प्रवक्ता, पीजीटी और सीएंडवी को डिमोट करने की सूची बनाई जा रही है। जल्द ही इन शिक्षकों से भी सेना के सेवाकाल की वरिष्ठता को वापस लेकर डिमोट कर दिया जाएगा।
उधर, उच्च शिक्षा निदेशक अमरजीत शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर वरिष्ठता सूची को नए सिरे से बनाया जा रहा है। पूर्व सैनिक कोटे से लगे कुछ शिक्षक नई वरिष्ठता सूची बनने से डिमोट होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सेना के सेवाकाल की सिविल में वरिष्ठता देने से इंकार किया है।
शिक्षकों से रिकवरी पर अभी सस्पेंस- पूर्व सैनिक कोटे से लगे शिक्षकों से रिकवरी करने को लेकर अभी संशय बना हुआ है। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस संबंध में अभी कुछ भी बताने से गुरेज कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार प्रदेश सरकार ने रिकवरी को लेकर कोई दिशा निर्देश नहीं दिए हैं।
हाईकोर्ट ने 2008 में दिए थे वरिष्ठता नहीं देने के आदेश- हिमाचल हाईकोर्ट ने साल 2008 में पूर्व सैनिक कोटे से लगे शिक्षकों को सेना सेवाकाल का वरिष्ठता लाभ नहीं देने के आदेश दिए थे। इस फैसले के लिए खिलाफ कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए सेना सेवाकाल की वरिष्ठता नहीं देने के आदेश दिए हैं।