पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले सरकारी डॉक्टरों से हिमाचल सरकार बांड मनी के बराबर के चेक भी लेगी। बांड मनी न भरने और सरकारी पैसे पर पीजी कर नौकरी छोड़कर भागने की प्रथा पर नकेल कसने के लिए हिमाचल सरकार पीजी पॉलिसी में यह बदलाव करने जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार बांड मनी के बराबर के चेक लेने के बाद अगर डॉक्टर कहीं जाता है तो चेक कैश करने के लिए लगा दिए जाएंगे। अगर चेक बाउंस होते हैं तो डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकेगा। ऐसे में अब उन्हें अपराध करने पर अभियोग का सामना करना पड़ा करेगा।
स्वास्थ्य विभाग ने नीति में संशोधन कर सरकार को मंजूरी के लिए भेज दिया है। मंत्रिमंडल की बैठक में पॉलिसी को मंजूरी मिलने के बाद नई व्यवस्था लागू हो जाएगी।
दरअसल, पिछले कुछ समय में सौ से ज्यादा डाक्टरों ने सरकारी पैसे पर पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की लेकिन तय बांड के अनुसार सेवाएं देने के बजाय बिना बांड मनी भरे नौकरी छोड़कर चले गए। पीजी करने वाले सरकारी डॉक्टरों की पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार उठाती है ऐसे में लाखों रुपये की वसूली के लिए सरकार प्रयास कर रही है।
सूत्रों का कहना है कि बांड भरने वाले डॉक्टरों को नोटिस देने के साथ साथ बर्खास्त करने की भी प्रक्रिया चल रही है। लेकिन अब नए डाक्टरों को इस खेल को करने से रोकने के लिए नीति में बदलाव किया जा रहा है।