हिमाचल में आटे की कालाबाजारी रोकने के लिए प्रदेश सरकार खुद बाजार में आटा उपलब्ध करवाने जा रही है। यह आटा बाजार मूल्य की अपेक्षा सस्ता होगा। कोरोना संकट के बीच प्रदेश सरकार ने गेहूं के लिए पंजाब सरकार से बात की है। पंजाब सरकार ने हिमाचल को गेहूं देने की हामी भी भर दी है। राज्य सरकार पंजाब सरकार के एफसीआई गोदामों से गेहूं उठाकर हिमाचल की मिलों में भेजेगी।
यहां पिसाई करने के बाद प्रदेश सरकार दुकानदारों तक आटा पहुंचाएगी। इस आटे की कीमत सरकार खुद तय करेगी और उसी कीमत पर दुकानदारों को आटा बेचना होगा, ताकि बाजार में आटे की हो रही कालाबाजारी पर अंकुश लग सके। गेहूं की पिसाई का खर्चा, ढुलाई का मार्जन रखने के बाद भी यह आटा लोगों को सस्ता मिलेगा।
सरकार मिलों के माध्यम से यह आटा दुकानदारों को देगी। सरकार का मानना है कि बिचौलियों की कमीशन खत्म होने से आटा सस्ता मिलेगा। प्रदेश सरकार को शिकायत मिल रही है कि कोरोना के चलते लोगों को बाजार में आटा महंगे दामों में मिल रहा है। हालांकि सरकार ने कई दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई भी की है।
लोगों को खुले बाजार में आटा सस्ता मिले, इसके चलते पंजाब सरकार से गेहूं लिया जा रहा है। मिलों में पिसवाकर आटा दुकानदारों को दिया जाएगा। सरकार इस आटे का रेट खुद तय करेगी।
- अमिताभ अवस्थी, सचिव, खाद्य आपूर्ति विभाग