ये वो सैनिक हैं, जो पहले और दूसरे विश्वयुद्ध के बाद आजाद हिंद फौज में शामिल न होकर घर आ गए थे, जिस कारण इन हजारों सैनिकों को सरकार से मात्र पांच सौ रुपये पेंशन से ही संतोष करना पड़ रह था। सैनिक कल्याण बोर्ड शिमला के सहायक निदेशक सेना मेडल पूर्व कर्नल पीएस अत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार ने नॉन पेंशनरों की मांग
को पिछले महीने लागू कर दिया है। सभी नॉन पेंशनरों को उनके कार्यालय में अपने कागजात जमा करवाने होंगे। जिस पर वे कागजी प्रक्रिया को पूरा कर सरकार को देंगे और उन्हें तीन हजार रुपये की पेंशन शुरू होगी।