शिमला प्लानिंग एरिया में भवन निर्माण और इन्हें नियमित करने को लेकर आए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के फैसले को सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है। शहरवासियों और सामाजिक संगठनों के दबाव के बीच सरकार ने इस फैसले को चुनौती देने का निर्णय लिया है।
प्रदेश सचिवालय में लॉ सचिव बलदेश शर्मा की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में इस बारे में टीसीपी और नगर निगम से सुझाव भी ले लिए गए हैं। करीब दो घंटे चली इस बैठक में टीसीपी निदेशक संदीप कुमार और नगर निगम आयुक्त जीसी नेगी ने अपने सुझाव दिए।
इसमें एनजीटी के फैसले के तहत दिए गए उन सभी नियमों पर चर्चा की गई जिसे लागू करने में परेशानी आ रही है। एनजीटी के आदेशों में कई ऐसे बिंदु हैं जिन पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
इस मुददे पर भ्ही हुआ गहरा मंथन
इसके अलावा यदि फैसले को चुनौती देनी है तो उसका क्या आधार रहेगा, इस पर भी गहरा मंथन हुआ। बैठक के बाद सरकार अब अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुट गई है जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जानी है।
टीसीपी निदेशक संदीप कुमार ने बताया कि बैठक में फैसले के विभिन्न पहलुओं को लेकर चर्चा हुई है। आखिर में यही फैसला लिया गया है कि सरकार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।
नगर निगम पास कर चुका है प्रस्ताव
एनजीटी के फैसले के खिलाफ नगर निगम पहले ही प्रस्ताव पारित कर चुका है। 29 नवंबर को हुई नगर निगम की मासिक बैठक में सभी पार्षदों ने सर्वसम्मति से फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर दिया था।
पार्षदों का कहना था कि सरकार को इस मामले में रिव्यू के लिए याचिका दायर करनी चाहिए। नगर निगम से प्रस्ताव पारित होने और सामाजिक संगठनों के एकजुट होने के बाद सरकार पर इस फैसले के खिलाफ चुनौती देने का दबाव बढ़ गया था।
इन बिंदुओं पर हुई चर्चा
बैठक में चर्चा हुई कि जिन भवनों के नक्शे पास किए जा चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। उन्हें अब नए नियमों के तहत निर्माण की अनुमति देनी है या नहीं। इसके अलावा भवन मालिकों से कंपाउंडिंग फीस और इनवायरनमेंट फीस दोनों वसूलने है या नहीं। डेवलपमेंट प्लान बनाने की अवधि बढ़ाने, मर्ज एरिया के अवैध भवनों और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चर्चा की गई है।