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हाईकोर्ट की फटकारः पकड़ने के बजाय नशा कारोबारियों को बचा रही पुलिस

Tue, 05 Dec 2017 12:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल हाईकोर्ट ने मादक पदार्थों की तस्करी मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस पर तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कुल्लू जिले के मलाणा गांव का उदाहरण देते हुए इस बात पर नाराजगी जताई कि अफसरशाही और पुलिस बल चंद प्रभावशाली लोगों के सामने असहाय बनकर नशे के कारोबार में संलिप्त लोगों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के बजाय उन्हें बचाने में लगे हैं।
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कोर्ट ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार इस काले कारोबार पर शिकंजा कसने को लेकर कोई उचित पॉलिसी बनाए। 

कोर्ट ने कहा कि प्रदेश सरकार व अन्य संबंधित एजेंसी को ऐसे अवैध कारोबार को बंद करने में असहाय होते हुए नहीं देखा जा सकता। हालांकि, पूरे प्रदेश में मादक पदार्थों का कारोबार हो रहा है, लेकिन मलाणा गांव इसका मुख्य केंद्र है। 
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कोर्ट ने पाया कि इस गांव में विदेशी लोग बस गए हैं और अपना कारोबार कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि स्थानीय लोगों की मदद के बिना विदेशी लोग काले कारोबार में संलिप्त नहीं हो सकते। 

मुख्य सचिव को आदेश दिए ये आदेश

इसके अलावा हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिए हैं कि वह अपना निजी शपथपत्र दायर कर कोर्ट को बताएं कि कुल्लू जिला के कसौल गांव में कितने अवैध निर्माण हैं। वहां कितने व्यावसायिक केंद्र जैसे होटल, ढाबे बिना अनुमति चल रहे हैं।

कोर्ट ने खेद जताया कि नशा निवारण जैसे कार्यक्रमों के लिए करोड़ों की राशि खर्ची जा रही है जबकि वास्तविकता यह है कि परिणाम केवल कागजी ही है। मामले पर सुनवाई 7 दिसंबर को होगी।

कोर्ट ने प्रदेश में बढ़ते मादक पदार्थों की तस्करी और उपयोग से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के बाद डीजीपी को भी कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। कोर्ट ने यह आदेश नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो चंडीगढ़ जोन के डायरेक्टर की ओर से दायर शपथपत्र का अवलोकन करने के बाद पारित किए।

इससे पहले कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने प्रदेश पुलिस और मादक पदार्थ ब्यूरो को नशे के इस काले कारोबार पर सख्ती से नकेल कसने के आदेश दिए थे।

कोर्ट ने इस संबंध में डीजीपी को आदेश दिए थे कि वह प्रदेश में विशेषकर कुल्लू में मादक पदार्थों के उत्पादन, इस्तेमाल और तस्करी पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और एनसीबी की संयुक्त टीम को पूरी मदद दे। 
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कोर्ट ने दिया अतिक्रमण हटाने का आदेश

 हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग की सड़क घट्टा चौक से लोक निर्माण विभाग के रेस्ट हाउस खुंडिया तक अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है। यह आदेश अधिशासी अभियंता कांगड़ा को दिए गए। तहसीलदार खुंडिया सोमवार को कोर्ट के समक्ष उपस्थित रहे।

उन्होंने अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में पूरी सहायता मुहैया करवाने का आश्वासन दिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने पुलिस अधीक्षक कांगड़ा को भी आदेश दिए कि वह अतिक्रमण हटाते समय पुलिस सहायता मुहैया करवाएं।

मामले पर सुनवाई 19 दिसंबर को होगी। जिलाधीश कांगड़ा ने अपने शपथ पत्र में माना कि अतिक्रमण बारे हाईकोर्ट के नाम लिखे गए पत्र के तथ्य सही हैं। उनके द्वारा अतिक्रमण करने वाले 17 लोगों के खिलाफ  कार्रवाई अमल में लाई गई है।
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