इनमें अधिकांश डॉक्टर ऐसे हैं, जिन्होंने हिमाचल में प्रैक्टिस करने के बाद बाहरी राज्यों का रुख किया है। बताया यह भी जा रहा है कि हिमाचल में डॉक्टरों की तनख्वाह कम है, जबकि बाहरी राज्यों में चिकित्सकों अच्छी खासी पगार मिलती है।
चाहे डॉक्टर सरकारी क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हों या निजी क्लीनिक में अपना कारोबार चला रहे हों। अकसर वे ज्यादा पैसे की चाह में ही बाहरी राज्यों में सेवाएं देना पसंद कर रहे हैं।
हिमाचल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। सरकार ने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में भले ही सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं शुरू की हों, लेकिन आज भी इन कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है।
कई डॉक्टरों ने बांड तोड़ा है। स्वास्थ्य निदेशालय से इनका रिकॉर्ड मांगा है। सरकार इनसे रिकवरी करने जा रही है। - बीके अग्रवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य