इस व्यवस्था से सरकार ने शराब के थोक विक्रेताओं के लिए दोहरी व्यवस्था की। कांग्रेस सरकार ने हिमाचल में शराब बेचने के लिए पहले बीवरेज कारपोरेशन का गठन किया। इसके बाद निगम के काम को ही सबलेट कर दिया।
इसके लिए शराब की 56 थोक दुकानें खोली गईं। इन्हें कारपोरेशन से शराब की थोक बिक्री का लाइसेंस मिला और रिटेलर यहीं से शराब उठाता था, जिसके बदले थोक विक्रेता को कमीशन मिलता। अब लाइसेंस निरस्त करने के बाद सरकार ने थोक शराब का काम खुद ही करने का फैसला लिया है।
नई व्यवस्था समाप्त होने से सरकार का चालू वित्तीय वर्ष में तीन करोड़ तक राजस्व बचेगा। सरकार ने आबकारी नीति, बीवरेज कारपोरेशन के कामकाज और राजस्व नुकसान की जांच से पहले पूरे दस्तावेज विभाग से तलब कर लिए हैं।
विभागीय स्तर पर इन्हें खंगालने का काम शुरू कर दिया है। इसके लिए आबकारी विभाग जांच एजेंसी तय करेगा। प्रधान सचिव आबकारी जेसी शर्मा ने लाइसेंस समाप्त करने की कार्रवाई की पुष्टि की है।