मेयर कुसुम सदरेट सभी पार्षदों को एक साथ न ले जाने की जिद्द पर अड़ी हैं तो पार्षदों का एक गुट सभी को एक साथ केरल ले जाने की मांग कर रहा है। इनका कहना था कि जब शहरी विकास विभाग ने सभी को एक साथ जाने की मंजूरी दी है तो मेयर क्यों पिक एंड चूज कर पार्षदों को अलग अलग भेज रही हैं।
दौरे को लेकर हंगामा इतना बढ़ गया कि नाराज भाजपा पार्षदों ने सचिवालय से लेकर शिक्षा मंत्री तक को फोन घुमा दिए। देर शाम तक मेयर ऑफिस से लेकर सचिवालय के शहरी विकास विभाग में दौरे को लेकर मामला गरमाया रहा। अब विवाद इतना बढ़ गया है कि एक फरवरी से प्रस्तावित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम पर ही संकट मंडराने लगा है।
सोमवार सुबह दौरे को लेकर शहरी विकास विभाग ने आधिकारिक मंजूरी दी। बाकायदा विभाग ने सभी पार्षदों को पहली से तीन फरवरी तक चलने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए भेजने को कहा। लेकिन मेयर सभी को साथ ले जाने को तैयार नहीं थी।
तर्क था कि शहर खाली हो जाएगा। लोगों की शिकायतें कौन सुनेगा। दोपहर दो बजे 17 पार्षदों की पहली लिस्ट जारी करने की तैयारी की गई। लेकिन इससे पहले कि लिस्ट जारी होती, पहले डिप्टी मेयर राकेश शर्मा और फिर पार्षदों से तीखी बहस हो गई।
भाजपा पार्षद किमी सूद, कमलेश मेहता, विदुशी शर्मा, पूर्णमल और माकपा पार्षद शैली शर्मा ने मेयर से पूछा कि आखिर सभी एक साथ क्यों नहीं जा सकते। कहा कि जब विभाग सबको एक साथ भेज रहा है तो मेयर को आपत्ति क्यों।
पार्षदों ने कहा कि दूसरा दौरा होना ही नहीं है, इसीलिए ऐसा किया जा रहा है। पिक एंड चूज कर पार्षदों को केरल ले जाना ठीक नहीं। इन्होंने मेयर से कहा कि यदि वे लिखित में दें कि दूसरा ग्रुप भी केरल जाएगा तो वे बाद में जाने को तैयार है।
लेकिन विवाद बढ़ता गया। इसके बाद सभी पार्षद आयुक्त कार्यालय में बैठ गए। पार्षदों से बात करने के बाद आयुक्त रोहित जम्वाल फिर मेयर ऑफिस गए, लेकिन फिर भी मामला शांत नहीं हुआ। देर शाम करीब छह बजे पार्षद प्रदेश सचिवालय पहुंच गए।
नाराज पार्षदों का गुट देर शाम प्रदेश सचिवालय पहुंच गया। यहां ये सभी शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज से मिले। कहा कि सबको साथ ले जाने में आखिर आपत्ति क्या है। कहा कि सरकार के आदेश आखिर मेयर ऑफिस क्यों नहीं मान रहा है।
क्यों पार्षदों की जगह सात अधिकारी ले जाए जा रहे हैं। ट्रेनिंग अधिकारियों की नहीं बल्कि पार्षदों की होनी है। बाद में मेयर कुसुम सदरेट और डिप्टी मेयर भी प्रदेश सचिवालय पहुंच गए।देर रात तक दौरे को लेकर सचिवालय में अलग अलग कार्यालयों में बहसबाजी होती रही।
अंत में भाजपा के हस्तक्षेप के बाद देररात दस बजे मामला सुलझा। भाजपा ने मेयर कुसुम सदरेट के केरल जाने पर रोक लगा दी और बाकि पार्षदों को जाने के लिए हरीझंडी दी। इससे मेयर को बड़ा झटका लगा है।