विधानसभा से लोकतंत्र प्रहरी सम्मान राशि को बंद करने की सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। आपातकाल के दौरान हिमाचल प्रदेश के कुछ लोग जेलों में बंद रहे थे। भाजपा का तर्क रहा है कि जब 1975 में पूरे देश में इमरजेंसी लगा दी गई थी तो देश में ये नेता लोकतंत्र की बहाली के लिए लड़ रहे थे।
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उनको जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया गया। उस समय मीसा और अन्य कानून के तहत बहुत सारे लोगों को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया। हिमाचल प्रदेश में ऐसे लोगों की संख्या लगभग 80 है। उनकी सरकार ने 20 हजार रुपये और 12 हजार रुपये प्रति माह देने का प्रावधान किया था।
पर कांग्रेस सरकार ने इस सम्मान राशि को बंद करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में सदन में बजट सत्र के दौरान संबंधित विधेयक को भी पारित किया गया है। उस दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष में भी तीखी नोकझोंक हुई थी। इसी योजना के तहत बने नियमों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की अधिसूचना जारी की गई है