विजिलेंस ब्यूरो और छह जिलों में दर्ज मामलों की जांच में तेजी लाने को सरकार ने जोर देना क्या शुरू किया, आरोपियों ने सरकार के करोड़ों रुपये चुकाने शुरू कर दिए हैं। हाल यह है कि पुलिस ने जांच को सिर्फ इसलिए थोड़ा धीरे कर दिया है, ताकि जो आरोपी सरकार को धोखा देकर रुपये हड़प गए थे, वह पैसे चुका लें। इसके बाद मामले की जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।
कुछ दिन पहले प्रमुख सचिव विजिलेंस संजय कुंडू ने छह जिलों के एसपी व विजिलेंस ब्यूरो के अधिकारियों के साथ बैठक कर समीक्षा की थी। इस दौरान यह बात सामने आई कि कई आरोपी पैसे जमा कर रहे हैं। इसके बाद प्रमुख सचिव ने मामलों की जांच पूरी करने की डेडलाइन को 28 फरवरी से बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया है।
सूत्रों का कहना है कि पुलिस में मामले दर्ज होने के बाद लंबे समय से जांच चलने के बावजूद आरोपियों पर न तो कार्रवाई हो रही थी और न ही वह पैसा जमा कर रहे थे। हाल में प्रमुख सचिव विजिलेंस की ओर से लगातार समीक्षा करने के बाद न सिर्फ पुलिस की जांच में तेजी आई है, बल्कि आरोपियों ने भी सरकारी पैसा लौटाना शुरू कर दिया है। नाम न लिखने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद भी अगर ठेकेदार पैसा वापस करते हैं तो उन्हें जांच में राहत मिल सकती है।
आबकारी विभाग भी करेगा मदद
सूत्रों ने बताया कि प्रमुख सचिव की समीक्षा बैठक में निर्णय लिया गया है कि अब बीवरीजेस लिमिटेड के गठन और उसके बाद सरकार को हुए घाटे की जांच ब्यूरो आबकारी विभाग के साथ मिलकर करेगा।
दरअसल, जांच में काफी ऐसे दस्तावेज और तकनीकी पहलू है, जिनमें दोनों विभागों की संयुक्त कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही थी। इसी को देखते हुए अब विजिलेंस के अधिकारियों के साथ आबकारी विभाग को सहयोग करने के लिए कहा गया है।