प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और प्रिंसिपलों के पद रिक्त चल रहे हैं लेकिन प्रदेश सरकार ने कुद ऐसा कर दिया जो कि हैरान कर देने वाला है। सरकारी स्कूलों में गिरते शिक्षा के स्तर और खराब परीक्षा परिणाम के लिए पर्याप्त शिक्षक न होना एक बड़ा कारण माना जा रहा है। इसके बावजूद सरकार ने कई शिक्षकों को अफसर बना दिया है।
प्रदेश में कई शिक्षक जिला स्तर के कार्यालयों में तो कई शिक्षा निदेशालय में ड्यूटी दे रहे हैं। करीब एक दर्जन शिक्षकों को प्रारंभिक और उच्च शिक्षा निदेशालय में सहायक निदेशक और उपनिदेशक के पद पर तैनाती दी गई है। इनके अलावा सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय
माध्यमिक शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत भी कई शिक्षक राज्य परियोजना कार्यालय में तैनात हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है सरकार स्वयं प्रदेश में शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए कितनी गंभीर है? शिक्षकों का डेपुटेशन रद्द करने का फैसला लेने वाली सरकार को इस संदर्भ में भी विचार करना चाहिए।