हिमाचल में टीसीपी दायरे में भवन मालिक अब ढाई मीटर से ज्यादा ऊंची छत नहीं बना सकेंगे। इससे ऊंचा शेल्टर या कमरा बनाने वो मंजिल काउंट होगा। प्रदेश सरकार संशोधित टीसीपी विधेयक में छह मंजिला अवैध भवन को नियमित करने का प्रावधान कर रही है।
इसमें उन भवनों की छत को भी मंजिल में काउंट किया जाएगा जिसे कमरे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रदेश में ऐसे हजारों भवन हैं जिन्होंने नियमानुसार छत नहीं बना रखी है। ऐसे में इन लोगों की छत को मंजिलों में गिना जाएगा। और इस निर्माण को नियमित करने के लिए लोगों को पैसे चुकाने पड़ेंगे।
राजधानी शिमला समेत सोलन, परवाणू, बद्दी-बरोटीवाला, हमीरपुर, धर्मशाला में ऐसे दर्जनों भवन हैं, जिनकी छत की ऊंचाई ढाई मीटर से ज्यादा है। इनमें लोगों ने कमरे बनाकर किराये पर चढ़ा रखे हैं। इससे भवन मालिकों को तो फायदा हो रहा है लेकिन सरकार को टैक्स नहीं मिल रहा है। स्टेट प्लानर संदीप शर्मा ने बताया कि अवैध भवन में जिन लोगों ने एटिक पर कमरे बना रखे हैं वो मंजिल गिनी जाएगी।
कई छतों में लगे हैं बिजली मीटर
टीसीपी से मिली जानकारी के मुताबिक लोगों ने टीसीपी से नक्शा पास कराने के बाद छत को बढ़ा दिया है। इनमें से कइयों में बिजली मीटर तक भी लगा रखे हैं। ऐसी शिकायतें भी आई हैं कि चार मंजिल का नक्शा पास कराने के बाद बेसमेंट खोल दी है। ये बेसमेंट मंजिल में गिनी जाएगी।
क्या होगा छह से अधिक मंजिलों का
प्रदेश में ऐसे भी भवन हैं जो छह मंजिल से ज्यादा हैं। एक्ट में संशोधन सिर्फ 6 मंजिल तक अवैध भवनों को नियमित करने के लिए किया जा रहा है। इन्हें बिजली व पानी के कनेक्शन व्यावसायिक लेने होंगे।