हाईकोर्ट के आदेश की अनुपालना करते हुए राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर के पदों को भरने के लिए नीति में जरूरी संशोधन कर दिया है। नई नीति के अनुसार अपील दायर करने के लिए 30 दिनों का समय रखा गया है। इस अपील का निपटारा करने के लिए 60 दिनों का समय रखा गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर के लिए वार्षिक आय पंद्रह हजार से बढ़ाकर पैंतीस हजार कर दी गई है।
न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने मुख्य सचिव को आदेश दिए थे कि वह सभी संबंधित अधिकारिओं से बैठक करें और नई पॉलिसी बनाने के लिए व्यावहारिक और तर्कपूर्ण संभावनाएं तलाशें। इसी कड़ी में सरकार ने नीति में संशोधन करने की हाईकोर्ट में जानकारी दी है। पुरानी नीति में दिए प्रावधानों के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या हेल्पर की नियुक्ति को चुनौती सिर्फ पंद्रह दिनों के भीतर ही दी जा सकती थी। अपील को निपटाने के लिए भी पंद्रह दिनों का ही समय दिया गया था।
न्यायाधीश ने राज्य सरकार के उन कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी प्रतिकूल टिप्पणी की थी जो एक ही छत के नीचे स्थापित हैं और उसी भवन में स्थापित दूसरे दफ्तर के लिए डाक के माध्यम से पत्राचार करते हैं। जिसे सेवादार के जरिये और ई मेल या अन्य माध्यम से भेजा जा सकता है।
इस बारे अनुपालना रिपोर्ट दायर कर अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने इस बारे जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं। इसके तहत एक ही छत के नीचे स्थापित दूसरे दफ्तर के लिए पत्राचार सेवादार के माध्यम से उसी दिन भेजना सुनिश्चित किया गया है। इसके अलावा न्यायिक और अर्ध न्यायिक शक्ति रखने वाले अधिकारिओं को ट्रेनिंग भी दी जाएगी, ताकि न्यायिक कार्य करते हुए कोई कोताही न बरती जाए।