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चुनावी साल में इतने करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है सरकार

Tue, 14 Feb 2017 02:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल सरकार चुनावी साल में बिजली की दरें नहीं बढ़ाएगी। इसके लिए राज्य सरकार बिजली बोर्ड की आर्थिक मदद करेगी। उदय योजना के तहत हिमाचल सरकार 2800 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। बिजली बोर्ड को यह ऋण इसकी खराब हालत सुधारने के लिए दिया जाएगा।
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राज्य सरकार सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का तीन फीसदी कर्ज ही ले सकती है। इस वित्त वर्ष में सरकार ने कर्ज लेने की सीमा को 3855 करोड़ रुपये तय किया था। इसमें से करीब दो हजार करोड़ रुपये का ऋण ले लिया गया है। अब बाकी बची ऋण सीमा के तहत करीब 2800 करोड़ रुपये का कर्ज लिया जाना है।

इस पैसे को सरकार बिजली बोर्ड को देगी। हाल ही में केंद्र सरकार ने हिमाचल को उदय योजना में शामिल किया है। इस योजना में शामिल हिमाचल देश का 18वां राज्य बन गया है। इसके तहत बिजली बोर्ड को जो ऋण लेना है, उसका 75 प्रतिशत हिमाचल सरकार वहन कर रही है। बोर्ड को महज 25 फीसदी ऋण ही देना होगा। बोर्ड को जब राहत मिलेगी तो इस पर बिजली की दरें बढ़ाने का भी दबाव कम रहेगा।
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ट्रांसमिशन नुकसान को कम करेगा बिजली बोर्ड

उदय योजना के तहत बिजली बोर्ड के ट्रांसमिशन को कम करने की योजना है। इसके लिए बिजली बोर्ड की ट्रांसमिशन प्रणाली को अधिक दुरुस्त किया जाएगा। इसकी लीकेज को घटाया जाएगा। वर्तमान में हिमाचल में ट्रांसमिशन नुकसान 12.75 फीसदी है। इस नुकसान को 3.5 फीसदी तक लाने का लक्ष्य होगा।

ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया ने कहा कि हिमाचल सरकार लगभग 2800 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर इसे बिजली बोर्ड को देगी। इससे बिजली बोर्ड की पतली हालत सुधरेगी और जाहिर है कि इससे दरें भी नियंत्रित होंगी। आगामी समय में इससे बिजली की दरों को बढ़ाने का विद्युत बोर्ड पर दबाव नहीं होगा। जब दबाव नहीं होगा तो दरें भी तेजी से नहीं बढ़ेंगी।
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