जल स्रोतों, भांग की खेती नष्ट करने तथा प्रदेश को बाह्य शौच मुक्त राज्य बनाने को चलाए अभियानों के सफल क्रियान्वयन के बाद अब सरकार ने सामाजिक क्षेत्र में दो बड़े जन अभियान चलाने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के दिशा-निर्देशानुसार इन दो नए अभियानों में सामाजिक सुरक्षा पेंशन को पात्र विकलांग व्यक्तियों की पहचान करना और शिशु लिंग अनुपात पर नियंत्रण को गर्भवती महिलाओं का शुरुआती पंजीकरण शामिल हैं।
राज्य में इन दो अभियानों के कार्यान्वयन को कार्य बनाने के लिए शुक्रवार को मुख्य सचिव वीसी फारका की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें जिला उपायुक्तों तथा स्वास्थ्य, शिक्षा, कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभागों के उच्च अधिकारियों ने भाग लिया। मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार 3 दिसंबर को विश्व विकलांगता दिवस से पूर्व अधिक से अधिक विकलांगजनों की जांच पूरा करने के लक्ष्य पर कार्य कर रही है, ताकि सभी पात्र पहली जनवरी 2017 से सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त करना आरंभ कर सकें।
कहा कि विकलांग व्यक्तियों का पता लगाने को संबंधित उपायुक्तों की निगरानी में राज्य भर में खंड स्तर पर चिकित्सा शिविर लगाए जाएंगे। मुख्य चिकित्सा अधिकारियों ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपस्थिति में इन शिविरों के आयोजन को पहले ही कार्य योजना तैयार कर ली है। आंगनबाड़ी तथा आशा कार्यकर्ता विकलांगता के लक्षण वाले व्यक्तियों को इन शिविरों में चिकित्सा जांच के लिए आने के लिए प्रेरित करेंगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार गर्भवतियों के शीघ्र पंजीकरण के लिए एक अन्य अभियान भी आरंभ करेगी और यह सुनिश्चित बनाया जाएगा कि सभी गर्भवती महिलाओं का 70 दिनों की अवधि के अंदर आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकरण हो। कहा कि परिणामों पर नियमित तौर पर नजर रखी जाएगी।
जन्म के समय लिंग अनुपात से संबद्ध सूचना प्राप्त करने के साथ-साथ जिला विशेष में 70 दिनों में कुल गर्भधारण एवं गर्भपात के आंकड़ों को भी हासिल किया जा सकेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य में लिंग अनुपात में सुधार लाने को यह अभियान बड़ा कारगर सिद्ध होगा। बैठक के दौरान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने इन अभियानों के प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों की ओर से अपनाई गई रणनीति पर विस्तार से जानकारी दी।