प्रदेश के दिव्यांगजनों के उत्थान और उनकी समस्याओं को सुलझाने के लिए हिमाचल सरकार गंभीर नहीं है। केंद्र सरकार के आदेशानुसार दिव्यांगजनों के लिए गठित विशेष कमेटियां निर्धारित समय पर बैठकें नहीं कर रही हैं। कार्यकारी कमेटी का रिन्यूवल भी समय पर नहीं हुआ है। दिव्यांगजनों के राज्य आयुक्त के पास चार अन्य विभागों का भी कार्यभार है।
ऐसे में राज्य आयुक्त दिव्यांगजनों के लिए पूरा समय नहीं दे पा रहे। बुधवार को राज्य सचिवालय में प्रेस को संबोधित करते हुए मुख्य आयुक्त दिव्यांगजन डा. कमलेश कुमार पांडेय ने यह बात कही। सरकार के कामकाज से नाखुश मुख्य आयुक्त ने मुख्य सचिव वीसी फारका से इस संबंध में बात भी की और व्यवस्थाओं को सुचारु करने के निर्देश दिए।
मुख्य आयुक्त दिव्यांगजन डा. कमलेश कुमार पांडेय ने बताया कि दिव्यांगों की समस्याओं को दूर करने और उन्हें उनके हक दिलाने के लिए सभी राज्यों में कमेटियां बनाई गई हैं। हिमाचल में गठित कमेटी का कार्य संतोषजनक नहीं है। दिव्यांगजनों के लिए प्रदेश में एक अलग से विभाग बनाना चाहिए। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में दिव्यांगों से संबंधित एक अलग विभाग होना चाहिए।
यहां प्रशिक्षित और विशेषज्ञ शिक्षक नियुक्त होने चाहिए। डा. कमलेश कुमार ने बताया कि हिमाचल में कुल 1.55 लाख दिव्यांग हैं। 79 हजार दिव्यांगों को प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए हैं। प्रदेश में 1700 दिव्यांगों को नौकरियां दी गई हैं। 155 का बैकलॉग अभी शेष है। दिव्यांगों के प्रमाणपत्र को सर्व मान्य करने के लिए यूडीआईडी बनाने का काम शुरू हो चुका है, जिसकी मान्यता सर्वत्र होगी।
मुख्य आयुक्त ने कहा कि दिव्यांगजन अपनी शिकायत ऑनलाइन भी कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें ccpd@nic.in पर ई मेल करनी होगी। निशक्त व्यक्ति अधिकार विधेयक 2014 के पारित होने के बाद दिव्यांगों के प्रकार 7 से 19 हो जाएंगे। उनको सरकारी सेवाओं में मिलने वाला आरक्षण का प्रतिशत 3 प्रतिशत से बढ़ कर 5 प्रतिशत हो जाएगा।
एनजीओ को फंडिंग की नहीं हो रही मानीटरिंग
मुख्य आयुक्त ने कहा कि हिमाचल में एनजीओ को दी जा रही फंडिंग की सही से मानीटरिंग नहीं हो रही है। केंद्र सरकार विभिन्न एनजीओ को ग्रांट देती है। उन्होंने हिमाचल सरकार से फंडिंग की मानीटरिंग करने को कहा। बुधवार को मुख्य आयुक्त ने प्रदेश की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों से भी बैठक की।