हिमाचल सरकार ने खनन नियमों में संशोधन करके पट्टाधारकों को बड़ी राहत दी है। प्रदेश के लगभग 40 खनन पट्टों की लीज अवधि 30 के बजाय 50 वर्ष कर दी गई है। सरकार ने यह फैसला उन खनन पट्टाधारकों के पक्ष में लिया है जो उद्योगों को कच्चा माल सप्लाई करते हैं। अधिकतर खनन पट्टे सोलन, बिलासपुर, सिरमौर कांगड़ा और मंडी जिलों में हैं।
प्रदेश सरकार ने यह व्यवस्था केवल मेजर खनन पट्टों केे लिए की है। इस श्रेणी में चूना पत्थर, रेत-बजरी आदि निकालने वाले ऐसे स्टोन क्रशर और खदानें हैं, जिनसे उद्योगों के लिए कच्चा माल सप्लाई होता है। इनमें ज्यादातर चूना पत्थर की खदानें हैं। 50 साल की अवधि लीज की स्वीकृति से गिनी जाएगी।
प्रदेश में उद्योगों को कच्चा माल सप्लाई करने वाले लगभग 50 खनन पट्टाधारक हैं। इनमें से 40 की लीज अवधि बढ़ा दी है। राज्य भू विज्ञानी रजनीश कुमार ने बताया कि उद्योगों के लिए कच्चे माल की सप्लाई करने वाले खनन पट्टों की लीज अवधि को 30 से बढ़ाकर 50 साल किया है। इससे पट्टाधारकों और उद्योगों दोनों को फायदा होगा है।