हिमाचल हाईकोर्ट के ग्रीन फैलिंग पर पूर्ण प्रतिबंध के बाद राज्य सरकार ने टीडी (टिंबर डिस्ट्रीब्यूशन) पॉलिसी बदल दी है। अब सूबे में बर्तनदारों को भवन निर्माण एवं मरम्मत के लिए खड़े हरे पेड़ नहीं मिलेंगे।
सरकार अब जंगलों में गिरे हुए पेड़ों को ही टीडी के तहत लोगों को देगी। इस बदलाव से प्रदेश में टीडी के हजारों आवेदन लटक गए हैं। मंडलों में आए आवेदन ठंडे बस्ते में डाल दिए हैं। नए आवेदनों को नहीं लिया जा रहा है।
वन कटान पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार के फैसले से बर्तनदारों के टीडी अधिकार भी प्रभावित होने लगे हैं। बता दें कि इससे पहले भी प्रदेश में टीडी पर रोक लग चुकी है।
कुछ साल पहले ही सरकार ने एक नीति बनाकर इसे बहाल किया था। अतिरिक्त मुख्य सचिव वन तरुण श्रीधर ने इसकी पुष्टि की है।