सरकार ने शपथपत्र से अदालत को बताया था कि लावारिस पशुओं के लिए हिमाचल गोवंश संरक्षण और संवर्द्धन अधिनियम 2018 बनाया है। इसमें हर जिले में पशु अभ्यारण्य स्थापित किए जाएंगे। जहां पर लावारिस पशु खासकर गाय को सुरक्षित रखा जाएगा।
अदालत को बताया था कि अधिनियम के अनुसार सिरमौर, सोलन, ऊना, और हमीरपुर में पशु अभ्यारण्य बनाए जाने को राशि भी जारी कर दी है और अन्य जिलों में भूमि तलाशने को कदम उठाए जा रहे हैं।
जनहित याचिका की सुनवाई के बाद न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी और न्यायाधीश ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने सरकार के मुख्य सचिव को आदेश दिए थे कि वह शपथ पत्र से अदालत को बताएं कि सिरमौर, सोलन, ऊना, और हमीरपुर में पशु अभ्यारण्य बनाए जाने के बारे में कितनी प्रोग्रेस हुई और कितनी राशि खर्च की जा चुकी है।
इसके बाद सरकार ने शपथ पत्र दायर किया, जिसे कोर्ट ने अधूरा पाते हुए मामले के पक्षकारों को जरूरी सुझाव अदालत के समक्ष रखने को कहा, ताकि इस समस्या से निजात दिलाने के लिए ठोस कार्रवाई हो। मामले पर सुनवाई 26 सितंबर को होगी।