हिमाचल के 40 एमडी डॉक्टरों के सुपर स्पेशलिस्ट बनने पर तलवार लटक गई है। सरकार की ओर से एमडी डॉक्टरों को एनओसी न देने पर डॉक्टर सुपर स्पेशलिस्ट (एमसीएच) का फॉर्म भरने से वंचित रह सकते हैं। फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल है।
भारत के लिए 55 सीटें हैं। हिमाचल के लिए 40 सीटें हैं। ऐसे में अगर एनओसी न मिला तो डॉक्टर सुपर स्पेशलिस्ट बनने से वंचित रहेंगे। यूनाइटेड रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के हिमाचल के प्रतिनिधि डॉ. अजय जरयाल ने बताया कि सरकार के इस नकारात्मक रवैये से हिमाचल से सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं बन पाएंगे।
वह सरकार से मांग करते हैं कि पीजी की पॉलिसी में बदलाव किया जाए। केवल आईजीएमसी के कुछ विभागों में ही सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की सुविधा है, लेकिन वह भी न के बराबर है। मेडिकल कॉलेज में हर साल डॉक्टर एमडी करते हैं। इनमें कुछ डॉक्टर स्पेशलिस्ट बनने के लिए डीएम (एमसीएच) करते हैं, लेकिन अस्पताल में नौकरी कर रहे इन डॉक्टरों पर सरकार के कड़े नियम आड़े आ रहे है।
सरकार इन डॉक्टरों से पहले कुछ सालों तक अस्पताल में ड्यूटी देने की बात कह रही है, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि सरकार एनओसी दे और बॉन्ड भरवा ले। यूआरडीए का कहना है कि पहले हिमाचल में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी है, ऊपर से पॉलिसी में बदलाव न होने से उन्हें दिक्कते झेलनी पड़ रही हैं। उन्होंने मांग की है कि पॉलिसी में बदलाव लाया जाए। यूआरडीए का कहना है कि टांडा, हमीरपुर व मंडी जैसे मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं हैं।