गौर करें तो हिमाचल करीब 47 हजार करोड़ के कर्जे में पहले से ही डूबा हुआ है। इस तरह से अब यह कर्जा 50 हजार करोड़ के आसपास हो जाएगा। सरकार पहले ही कह चुकी है कि बिना लोन लिए सरकार चलाना मुश्किल है। हिमाचल में जिस किसी की भी सरकार सत्ता में रही है, कर्जे लेकर ही देनदारियां निपटाई गई हैं।