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रोक के बावजूद धड़ल्ले से बिकी रही है सिंगल सिगरेट

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प्रदेश में खुली सिगरेट बेचने की रोक के बावजूद राजधानी में धड़ल्ले से सिगरेट बिकती रही। राज्य सरकार के फरमान का दुकानदारों और खरीददारों पर कोई असर नहीं दिखा। स्कूलों के नजदीक दुकानदार एक एक सिगरेट बेचते दिखे। सरकार के इस फैसले को सख्ती से लागू कर पाने में महकमे के हाथ भी खड़े हैं। इसकी वजह स्टाफ की बेहद कमी बताई जा रही है।
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जानकारी के मुताबिक जिस खाद्य सुरक्षा अधिकारी को सिंगल सिगरेट बेचने वाले के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैनात किया है, उसके पास शिमला के अलावा किन्नौर और बिलासपुर का जिम्मा भी है। इन जिलों में हजारों दुकानदार हैं जो तंबाकू बिक्री का कारोबार करते हैं। इस स्थिति में एक अकेला अधिकारी दोषी दुकानदारों के खिलाफ कितनी कार्रवाई कर पाएगा?

ऐसे में सरकार का यह आदेश महज सरकारी दस्तावेज बनकर ही न रह जाए। प्रदेश में गुटखा और खैनी की बिक्री पर भी प्रतिबंध है और इसे बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश है। इस आदेश के बाद दुकानों में सामने तो यह चीजें नजर नहीं आती लेकिन इनकी बिक्री बंद नहीं हुई है।
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ब्लैक में बिक रहा गुटखा और खैनी

इस फैसले के बाद तंबाकू की दुकान चलाने वाले अधिकांश दुकानदार गुटखा और खैनी तय कीमतों से कई गुणा कीमत पर ब्लैक में इन्हें बेच रहे हैं। इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है किसी ने आज तक इनकी दुकानों की तलाशी नहीं ली। इस स्थिति में गुटखा और खैनी का सेवन करने वाले व्यक्ति कहते हैं कि सख्त कानून का फायदा तो ऐसे दुकानदार उठा रहे हैं ब्लैक में प्रतिबंधित सामान बेचकर चांदी कूट रहे हैं। अब सिगरेट के मामले में भी आने वाले दिनों में ऐसा ही होगा जो सिंगल सिगरेट अभी पांच रुपये में उपलब्ध है उसे यह पांच की जगह सात या आठ रुपये में बेच देंगे।

तर्क देंगे सरकार ने पाबंदी लगा रखी है अपने रिस्क पर बेच रहा हूं इसलिए दो तीन रुपये ज्यादा ले रहा हूं। आम जनता का कहना है कि जब सरकार इस तरह के फैसले करती है तो उसे सख्ती से लागू भी करवाए तभी इसका असर समाज पर दिखेगा अन्यथा इस तरह के फैसलों से कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा और आम जनता पिसती नजर पाएगी।
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