फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमाचल: सरकार की अपील खारिज, हाईकोर्ट ने कहा- हक मांगने पर नौकरी से निकालना गलत

Wed, 08 Jul 2026 05:20 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए चार दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वैधानिक अधिकारों की मांग करने पर कर्मचारियों को नौकरी से निकालना पूरी तरह गलत है।
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए चार दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वैधानिक अधिकारों की मांग करने पर कर्मचारियों को नौकरी से निकालना पूरी तरह गलत है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सरकार की ओर से दायर अपीलों को खारिज करते हुए कर्मचारियों की बहाली और उन्हें ब्याज सहित पिछला वेतन देने के आदेश को बरकरार रखा है। बागवानी विभाग में देव राज और अन्य कर्मचारियों को मार्च 1996, अगस्त 2006 और अप्रैल 2008 में दैनिक वेतन भोगी के रूप में नियुक्त किया गया था।

विज्ञापन

मई 2009 में इन कर्मचारियों ने साप्ताहिक अवकाश न मिलने की शिकायत लेबर इंस्पेक्टर से की थी और ईपीएफ अधिनियम के तहत नोटिस भी जारी करवाया था। आवाज उठाने के कारण विभाग ने 7 अगस्त 2009 को इनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। इसके बाद कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया साल 2010 में अदालत के अंतरिम आदेश के बाद उन्हें 7 जनवरी 2010 को दोबारा काम पर रख लिया गया था। बाद में औद्योगिक न्यायाधिकरण ने भी कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया।
विज्ञापन

16 सितंबर 2021 को सिंगल जज बेंच ने न केवल औद्योगिक न्यायाधिकरण के बहाली के फैसले को सही ठहराया, बल्कि कर्मचारियों को उनकी बर्खास्तगी की अवधि लगभग 5 महीने का पूरा पिछला वेतन, वरिष्ठता और सेवा की निरंतरता देने के भी निर्देश दिए। राज्य सरकार ने इस फैसले को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी थी। खंडपीठ ने सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि कर्मचारी 1996 से विभाग में सेवाएं दे रहे थे और उन्हें बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के केवल इसलिए निकाल दिया गया, क्योंकि वे कानूनी अधिकारों की मांग कर रहे थे। खंडपीठ ने सिंगल जज और ट्रिब्यूनल के फैसलों में हस्तक्षेप करने से साफ इन्कार कर दिया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें