राज्य सरकार की 17 अप्रैल 2013 की नीति के अनुसार केवल उन्हीं पीटीए शिक्षकों को पुनर्नियुक्ति का लाभ दिया जाना था, जिनकी नियुक्ति 30 दिसंबर 2007 तक हो चुकी थी और बाद में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। याचिकाकर्ता की आधिकारिक नियुक्ति 1 दिसंबर 2008 को हुई थी, जो निर्धारित कट-ऑफ तिथि के बाद की थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि उनके पद के लिए चयन प्रक्रिया 18 सितंबर 2007 को शुरू हुई थी और 4 अक्टूबर 2007 को साक्षात्कार भी हो चुके थे।
हालांकि, एक अयोग्य उम्मीदवार की नियुक्ति और उससे जुड़े न्यायिक विवाद के कारण उन्हें नियुक्ति पत्र मिलने में देरी हुई। इसलिए उन्हें कट-ऑफ तिथि से पहले नियुक्त माना जाना चाहिए। खंडपीठ ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि सेवा कानून के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार केवल चयन प्रक्रिया में शामिल होने या उसके पूरा होने से नियुक्ति का अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं हो जाता। नियुक्ति की प्रभावी तिथि वही होगी, जिस दिन उम्मीदवार वास्तव में सेवा में कार्यभार संभालता है।